15 नवम्बर 2018
अयोध्या: न्यायिक  प्रकरिया को ध्वस्त करने से बाज आओ

अयोध्या: न्यायिक प्रकरिया को ध्वस्त करने से बाज आओ

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पोलिट ब्यूरो ने अयोध्या प्रकरण को लेकर, न्यायिक प्रक्रिया पर हो रहे हमलों पर चिंता जताते हुए, 5 नवंबर को निम्रलिखित बयान जारी किया:

अयोध्या विवाद प्रकरण को बाद में विचार के लिए लेने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लेकर जिस तरह के हालात विकसित हो रहे हैं, उन पर पोलिट ब्यूरो ने अपनी गंभीर चिंता जतायी है।

भाजपा-आरएसएस के नेताओं द्वारा और भाजपा सरकार के केंद्रीय  मंत्रियों द्वारा बहुत ही चिंतित करने वाले बयान दिए जा रहे हैं, जिनमें 1992 के जैसे हालात पैदा करने की धमकी दी जा रही है, जब बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किया गया था। यह दौर अपने पीछे देश भर में हुए सांप्रदायिक दंगों में खून-खराबे तथा कत्लो-गारत की खूनी लहर छोड़ गया था।

सुप्रीम कोर्ट के 1994 के फैसले में बाबरी मस्जिद के ध्वंस काे एक राष्ट्रीय कलंक बताया गया था और कहा गया था कि सिर्फ एक प्राचीन निर्माण को ही ध्वस्त नहीं किया गया था बल्कि बहुसंख्यकों की न्याय व ईमानदारी की भावना में अल्पसंख्यकों के भरोसे को भी ध्वस्त किया गया था। इसने कानून के शासन तथा संवैधानिक प्रक्रियाओं में उनके भरोसे को हिला कर रख दिया है।

भाजपा ने आधिकारिक रूप से यह रुख अपनाया था कि वह अदालत के फैसले को मानेगी। लेकिन, अब जब आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वह इससे पलट रही है। आरएसएस की अगुआई में इस की कर्कश मांगें उठायी जा रही हैं कि मंदिर बनाने के लिए एक नया कानून बनाया जाए। यह न्यायिक प्रक्रिया को ही ध्वस्त करने जैसा है। यह असंवैधानिक है और इसलिए अवैध है।


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