22 सितम्बर 2019
सांप्रदायिक राष्ट्रवादी  कट्टरता तथा आतंकवाद विरोध पर केंद्रित आख्यान और मोदी की गढ़ी हुई छवि ने जनता के मुद्दों को हराकर मोदी को दोबारा गद्दी पर पहुंचाया

सांप्रदायिक राष्ट्रवादी कट्टरता तथा आतंकवाद विरोध पर केंद्रित आख्यान और मोदी की गढ़ी हुई छवि ने जनता के मुद्दों को हराकर मोदी को दोबारा गद्दी पर पहुंचाया

'सांप्रदायिक  राष्ट्रवादी  कट्टरता और आतंकवाद के विरोध के गिर्द केंद्रित अपने आख्यान के सहारे, मोदी राज के पांच साल में उठे आम जनता के रोजी-रोटी के सवालों की ओर से ध्यान हटाने के जरिए, भाजपा-एनडीए ने 17वीं लोकसभा के चुनाव में प्रचंड तथा निर्णायक जनादेश हासिल किया है।' इसमें, मीडिया के एक हिस्से व अकूत धन के इस्तेमाल समेत, ‘अनेक कारकों के योग से गढ़ी गयी मोदी की छवि ने योग दिया है।’ सी पी आइ (एम) महासचिव, सीताराम येचुरी ने 27 मई को नई-दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में हाल के चुनाव नतीजों पर टिप्पणी करते हुए यह बात कही। वह सी पी आइ (एम) पोलिट ब्यूरो की दो-दिनी बैठक में चुनावों की आरंभिक समीक्षा में निकले शुरूआती नतीजों की मीडिया को जानकारी दे रहे थे।

इन चुनावों में सी पी आइ (एम) तथा वामपंथ को खासतौर पर अपने गढ़ों में भारी धक्का लगने के कारणों के संबंध में संवाददाताओं के सवालों के जवाब में येचुरी ने स्पष्ट किया कि पार्टी इन कारणों की गहराई से छानबीन कर रही है। इस क्रम में विशेष रूप से केरल, प0 बंगाल तथा त्रिपुरा में राज्य कमेटियों की बैठक कर इन कारणों की निशानदेही की जाएगी और इन रिपोर्टों को शामिल कर एक समीक्षा रिपोर्ट, केंद्रीय कमेटी की 7 से 9 जून तक होने जा रही बैठक में विचार तथा अनुमोदन के लिए पेश की जाएगी, ताकि जरूरी सुधार कर पार्टी आने वाले दिनों में अपनी स्वतंत्र शक्ति को और जनता के संघर्षों के जरिए अपने राजनीतिक हस्तक्षेप को, मजबूत कर सके।

प0 बंगाल में पार्टी व वामपंथ के खराब प्रदर्शन को लेकर पत्रकारों के अनेक सवालों के जवाब में येचुरी ने याद दिलाया कि प0 बंगाल तथा त्रिपुरा में ये चुनाव भारी आतंक तथा हिंसा की पृष्ठïभूमि में हुए थे। उन्होंने याद दिलाया कि इन चुनावों में प0 बंगाल में 2 और त्रिपुरा में 1 वाम मोर्चा कार्यकर्ता को अपनी जान से हाथ भी धोना पड़ा है। चुनाव आयोग यहां स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने का अपना वादा पूरा करने में पूरी तरह से विफल रहा है। त्रिपुरा पश्चिमी लोकसभाई क्षेत्र में तो 90 फीसद मतदान केंद्रों पर सत्ताधारी भाजपा ने धांधली की थी। कांग्रेस पार्टी ने भी 50 फीसद मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान कराने की मांग की थी। खुद अपनी जांच मेंं बहुत बड़े पैमाने पर धांधली साबित होने के बाद, भी चुनाव आयोग ने करीब 10 फीसद मतदान केंद्रों पर ही दोबारा मतदान कराया। बिल्कुल अपर्याप्त होने के बावजूद, यह भी देश भर में किसी भी सीट पर सबसे ज्यादा पुनर्मतदान था।

प0 बंगाल में पार्टी तथा वामपंथ के निराशाजनक प्रदर्शन पर पत्रकारों के सवालों के जवाब में सी पी आइ (एम) महासचिव ने याद दिलाया कि किस तरह तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के प्रतिस्पर्धी सांप्रदायिक दुहाई ने, राज्य में जनतांत्रिक राजनीति की गुंजाइश को बहुत कम कर दिया है। राज्य में कांग्रेस के  साथ पिछली बार की जीती सीटों पर आपसी टकराव टालने पर सहमति न बन पाने पर सवालों के जवाब में येचुरी ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने उन्हीं दो सीटों पर जीत हासिल की है, जिन पर वाम मोर्चा ने इकतरफा तरीके से अपने उम्मीदवार नहीं खड़े किए थे। केरल में एलडीएफ की नाकामी पर सवालों के जवाब में येचुरी ने रेखांकित किया कि सी पी आइ (एम) राज्य सेक्रेटेरियट की राय में जनता की मोदी राज को हराने की इच्छा का फायदा, कांग्रेस के नेतृत्व में यूडीएफ को मिल गया।

इस सवाल के जवाब में कि क्या एनडीए के सांप्रदायिक राष्ट्रवादी कट्टरता के अभियान के जवाब में विपक्ष का चुनाव अभियान, ‘नकारात्मक’ मोदीविरोधी अभियान हो गया था, येचुरी ने जोर देकर कहा कि वामपंथ का प्रचार अभियान जनता की जिंदगी के रोजमर्रा के मुद्दों पर ही केंद्रित रहा था। लेकिन, उक्त मोदी आख्यान इन तमाम मुद्दों को परे खिसकाने में कामयाब रहा। इसी प्रकार इस सवाल के जवाब में कि क्या विपक्षी गठबंधन बनने में देरी का चुनाव नतीजों पर असर पड़ा था, येचुरी ने याद दिलाया कि 200 से ज्यादा सीटों पर भाजपा/एनडीए के उम्मीदवार 50 फीसद से ज्यादा वोट हासिल कर जीते हैं, जिसके सामने गठबंधन की कमजोरी या मजबूती का कोई अर्थ नहीं रह जाता है। दूसरी ओर, इस सवाल के जवाब में कि क्या ईवीएम से चुनाव की विश्वसनीयता के संबंध में विपक्ष के सारे प्रश्न अब खत्म हो गए हैं, येचुरी ने याद दिलाया कि अभी भी वीवीपैट पर्चियों के मिलान की पूरी रिपोर्ट नहीं आयी है। याद रहे कि विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप हर विधानसभाई क्षेत्र में पांच मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों का ईवीएम वोट मिलान, मतगणना के शुरू में ही कराने और उसमें असंगति पाए जाने पर पूरे विधानसभाई क्षेत्र में वीवीपैट पर्चियों की गिनती कराएजाने की मांग की थी, जिसे चुनाव आयोग ने अपने नियमों का बहाना बनाकर ठुकरा दिया था।

सी पी आइ (एम) महासचिव ने, आने वाले समय की चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए, आने वाले दिनों के लिए पार्टी के हस्तक्षेप के लिए चार प्रमुख काम गिनाए:

  • धर्मनिरपेक्ष, जनतांत्रिक गणतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की हिफाजत करना।
  • जनता के अधिकारों की हिफाजत करना।
  • नागरिक स्वतंत्रताओं की हिफाजत करना।
  • जनता की रोजी-रोटी के मुद्दों पर आंदोलन खड़े करना।

सी पी आइ (एम) पोलिट ब्यूरो की 26-27 मई को नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद निम्रलिखित प्रैस वक्तव्य जारी किया गया:

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा-एनडीए ने 17वीं लोकसभा के चुनाव में एक प्रचंड तथा निर्णायक जनादेश हासिल किया है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश तथा कुछ अन्य राज्यों को छोडक़र, अधिकांश राज्यों में विपक्षी पार्टियों को इस चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

सी पी आइ (एम) तथा वामपंथ को, खासतौर पर अपने गढ़ों में, इस चुनाव में भारी धक्का लगा है।

एनडीए की सरकार ने पिछले पांच वर्षों में जनता के रोजी-रोटी के  जो अनेकानेक सवाल खड़े कर दिये थे, भाजपा ने कामयाबी के साथ लोक आख्यान की उनकी तरफ से मोड़ दिया। उसकी जगह उसने सांप्रदायिक  राष्ट्रवादी कट्टरता के गिर्द अपना आख्यान बुना, जिसने आतंकवाद का मुकाबला करने के मुद्दे के साथ जुडक़र, जनता की रोजमर्रा की चिंताओं के दूसरे सभी सवालों को बुहार कर परे कर दिया।

इसमें मदद की, अनेकानेक कारकों के योग के जरिए गढ़ी गयी मोदी की छवि ने। इन कारकों में प्रौद्योगिकी तथा उसके औजारों का इस्तेमाल कर और बिग डॉटा एनालिटिक्स तथा लघुतर स्तर पर सामाजिक इंजीनियरिंग के जरिए लोगों तक संदेश पहुंचाना शामिल है। मीडिया के एक हिस्से ने, अपार धनशक्ति के बल पर किए जा रहे इस तरह के छवि प्रक्षेपण में साझेदारी की थी। चुनाव आयोग की भूमिका भी एक कारक बनी, जिसने इस तरह के आख्यान को गढ़े जाने की इजाजत दी। आरएसएस से संबद्घ संगठनों के विशाल ताने-बाने ने इस प्रक्रिया में मदद की थी।

हमारे गढ़ों में सी पी आइ (एम) के चुनावी आधार में भारी गिरावट आयी है। पोलिट ब्यूरो ने इस गिरावट के लिए जिम्मेदार कुछ मुद्दों पर चर्चा की। केंद्रीय कमेटी की 7 से 9 जून, 2019 तक होने जा रही बैठक में, राज्यों की रिपोर्टों पर आधारित एक रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी तथा उसे अपनाया जाएगा, ताकि इन चुनावों के अनुभवों के गंभीर आत्मनिरीक्षण के आधार पर, समुचित सबक सीखे जा सकें। हमारे मजबूत राज्यों में राज्य कमेटियां, केंद्रीय कमेटी की बैठक  से पहले अपनी बैठक करेंगी तथा आत्मालोचनात्मक तरीके से पार्टी के चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा करेंगी। और इसके आधार पर केंद्रीय कमेटी सुधार के जरूरी कदम तय करेगी ताकि सी पी आइ (एम) की स्वतंत्र शक्ति को और जन संघर्षों के जरिए राजनीतिक हस्तक्षेप की उसकी क्षमताओं को मजबूत किया जा सके।

सी पी आइ (एम) उन सभी मतदाताओं का धन्यवाद करती है, जिन्होंने पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में वोट डाला है। पार्टी के उम्मीदवारों में से तीन--तमिलनाडु में 2 तथा केरल में 1--17वीं लोकसभा के लिए चुने गए हैं।
पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा, दोनों में ये चुनाव भारी आंतक तथा हिंसा की पृष्ठभूमि में हुए हैं। सी पी आइ (एम) के समर्थकों के मतदान से रोके जाने की बड़े पैमाने पर रिपोर्टें आयी थीं। ‘स्वतंत्र तथा निष्पक्ष’ चुनाव कराने के अपने वादे के चुनाव आयोग द्वारा लागू किए जाने के हमारे अधिकांश ज्ञापनों को अनदेखा कर दिया गया। चुनाव के दौरान प0 बंगाल में 2 और त्रिपुरा में 1, वाम मोर्चा समर्थकों ने अपने प्राण गंवाए हैं। इन दोनों ही राज्यों में चुनावोत्तर हिंसा जारी है। यह हिंसा, सांप्रदायिक टकरावों का रूप लेने की दिशा में खतरनाक मोड़ ले रही है।

चुनाव नतीजों की घोषणा के फौरन बाद मिसाल के तौर पर हरियाणा, मध्य प्रदेश आदि राज्यों से अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरें आ रही हैं। यह नामित-प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी की इस घोषणा के खिलाफ है कि नयी सरकार समावेशी होगी और जनता के सभी तबकों में भरोसा जगाएगी (सब का साथ, सब का विश्वास)।

साफ है कि भारतीय जनता और हमारे देश के सामने आगे बड़ी चुनौतियां आने जा रही हैं। हमारे धर्मनिरपेक्ष जनतांत्रिक गणराज्य की हिफाजत; संवैधानिक संस्थाओं की हिफाजत; जनता के अधिकारों व नागरिक स्वाधीनताओं की हिफाजत और जनता के रोजी-रोटी के मुद्दे; इन सभी मुद्दों पर सी पी आइ (एम) भारत की जनता से प्रबल अपील करती है कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए बढक़र आगे आएं।

पोलिट ब्यूरो, भारतीय जनता के सभी हिस्सों का आह्वïन करता है कि हमारे सामाजिक ताने-बाने के काम्य सौहाद्र्र को पुख्ता करें और आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट होकर उठ खड़े हों।


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